Sheetal Devi Biography in Hindi | शीतल देवी की जीवनी

Sheetal Devi Biography in Hindi: जम्मू-कश्मीर की रहने वाली शीतल देवी बिना हाथों के पैदा हुई, लेकिन आज वह दुनिया की सबसे प्रेरणादायक पैरा तीरंदाजों में से एक हैं। उन्होंने अपने पैरों से तीरंदाजी सीखकर एशियाई पैरा गेम्स 2023 में दो स्वर्ण पदक जीते। शीतल को 2024 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके कोच कुलदीप बिष्ट और सतपाल सिंह ने उनकी प्रतिभा को निखारा। गरीबी और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद शीतल ने हिम्मत नहीं हारी और आज वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं।

शीतल देवी का परिचय

भारत की धरती पर कई ऐसे योद्धा जन्मे हैं जिन्होंने अपनी सीमाओं को अपनी ताकत बना लिया। जम्मू-कश्मीर की रहने वाली शीतल देवी भी उन्हीं में से एक हैं। बिना हाथों के पैदा हुई, लेकिन आज वह पूरी दुनिया में अपनी सटीक तीरंदाजी और हौसले के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी कमी सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती।

Sheetal Devi Biography in Hindi
Credit: Instagram

शीतल देवी – संक्षिप्त जानकारी

जानकारी विवरण
पूरा नाम शीतल देवी
जन्म तिथि 10 जनवरी 2007
जन्म स्थान लोइदर गांव, किश्तवाड़, जम्मू-कश्मीर, भारत
माता का नाम शकुंतला देवी
पिता का नाम नरिंदर सिंह
आयु (2025 तक) लगभग 18 वर्ष
पेशा पैरा तीरंदाज (Para Archer)
कोच कुलदीप बिष्ट और सतपाल सिंह
प्रमुख उपलब्धियाँ एशियाई पैरा गेम्स 2023 में दो स्वर्ण पदक
पुरस्कार अर्जुन पुरस्कार (2024), खेल रत्न नामांकन
राष्ट्रीयता भारतीय
वैवाहिक स्थिति अविवाहित
निवास जम्मू-कश्मीर, भारत

प्रारंभिक जीवन

शीतल देवी का जन्म जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के लोइदर गांव में हुआ था। जन्म के समय उनके दोनों हाथ नहीं थे, जिससे परिवार बहुत चिंतित था। उनके माता-पिता ने कभी हार नहीं मानी और हमेशा उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। बचपन से ही शीतल को खेलों में दिलचस्पी थी। वह दूसरों की तरह काम करना चाहती थीं, लेकिन हाथ न होने के कारण उन्हें अपने पैरों से हर काम करना सीखना पड़ा।

शिक्षा

शीतल देवी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल से की। उनकी शिक्षा के दौरान कई चुनौतियाँ आई, क्योंकि स्कूलों में विशेष सुविधाएं नहीं थी। फिर भी शीतल ने कभी हार नहीं मानी और पढ़ाई के साथ-साथ खेलों पर भी ध्यान दिया। बाद में उन्हें Indian Army की Northern Command के Rehabilitation Centre में भर्ती कराया गया, जहाँ से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।

करियर की शुरुआत

शीतल देवी की मुलाकात सेना के कोच कुलदीप बिष्ट और सतपाल सिंह से हुई, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचाना। शुरुआत में उन्होंने देखा कि शीतल अपने पैरों से चीजें बहुत सटीकता से कर सकती हैं। इसी आधार पर उन्होंने शीतल को तीरंदाजी (Archery) सिखाने का निर्णय लिया।

शुरुआत में पैरों से धनुष पकड़ना आसान नहीं था, लेकिन शीतल ने दिन-रात अभ्यास किया। धीरे-धीरे वह इतनी माहिर हो गईं कि साधारण खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया।

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प्रमुख उपलब्धियाँ

  • एशियाई पैरा गेम्स 2023 (हांगझोऊ, चीन) में शीतल देवी ने दो स्वर्ण पदक जीते…
    • महिला कंपाउंड ओपन टीम इवेंट में स्वर्ण
    • व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण
  • वह दुनिया की पहली ऐसी महिला पैरा तीरंदाज हैं जिन्होंने बिना हाथों के पैरों से तीर चलाकर स्वर्ण पदक जीता।
  • उन्हें अर्जुन पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया।
  • उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम ऊँचा किया और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनीं।

चुनौतियाँ और संघर्ष

शीतल देवी का जीवन आसान नहीं था। बिना हाथों के पैदा होना, ग्रामीण इलाकों में पली-बढ़ी होना, आर्थिक स्थिति कमजोर होना , ये सब बड़ी चुनौतियाँ थीं। लेकिन उन्होंने हर कठिनाई को अपनी ताकत बना लिया।

जब उन्होंने तीरंदाजी शुरू की, तो कई लोगों को शक था कि यह संभव भी है या नहीं। लेकिन शीतल ने अपने प्रदर्शन से सबको गलत साबित किया। आज वह “Miracle Girl of India” (भारत की चमत्कारी लड़की) कहलाती हैं।

परिवार और निजी जीवन

शीतल देवी के पिता नरिंदर सिंह किसान हैं और उनकी माँ शकुंतला देवी गृहिणी हैं। उनके परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और उन्हें प्रोत्साहित किया। शीतल अभी अविवाहित हैं और पूरी तरह अपने खेल करियर पर ध्यान दे रही हैं।

कुल संपाति

शीतल देवी की कुल अनुमानित नेट वर्थ लगभग 20 से 30 लाख रुपये के बीच मानी जाती है। उन्हें सरकारी पुरस्कारों, स्पॉन्सरशिप और प्रतियोगिताओं से सम्मान राशि मिलती है। आने वाले वर्षों में उनकी आय और प्रतिष्ठा दोनों बढ़ने की संभावना है।

विरासत और प्रेरणा

शीतल देवी आज सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि प्रेरणा की मिसाल हैं। उन्होंने साबित किया कि सीमाएं केवल दिमाग में होती हैं। उनकी सफलता ने लाखों युवाओं को सिखाया है कि हिम्मत और मेहनत से कुछ भी संभव है।

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निष्कर्ष

शीतल देवी की कहानी संघर्ष, साहस और सपनों की कहानी है। उन्होंने यह दिखाया कि शरीर की कमजोरी सफलता की राह में बाधा नहीं, बल्कि प्रेरणा बन सकती है। बिना हाथों के जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपने पैरों से तीरंदाजी में वह मुकाम हासिल किया है जो बहुतों के लिए सपना है। शीतल देवी आज भारत का गर्व हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत।

हम आपसे उम्मीद करते हैं कि Sheetal Devi Biography in Hindi लेख को आपको पढ़कर पसंद और आनंद आया होगा। इस लेख से संबंधित अगर आपका कोई भी राय या सवाल है तो आप हमे कमेंट करके पूछ सकते हैं। आपको इस लेख को पूरी पढ़ने के लिए दिल से धन्यबाद। अगला लेख आपके बीच बहुत ही जल्द आएगा।

FAQs

शीतल देवी कौन हैं?

शीतल देवी भारत की प्रसिद्ध पैरा तीरंदाज हैं जिन्होंने बिना हाथों के तीरंदाजी में स्वर्ण पदक जीता है।

शीतल देवी का जन्म कहाँ हुआ था?

उनका जन्म जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के लोइदर गांव में हुआ था।

शीतल देवी ने तीरंदाजी कैसे सीखी?

उन्होंने सेना के कोचों की मदद से अपने पैरों से तीरंदाजी सीखकर दुनिया को चकित कर दिया।

शीतल देवी ने कौन-कौन से पुरस्कार जीते हैं?

उन्हें एशियाई पैरा गेम्स साल 2023 में दो स्वर्ण पदक और साल 2024 में अर्जुन पुरस्कार मिला।

क्या शीतल देवी शादीशुदा हैं?

नहीं, वह अभी अविवाहित हैं और खेल पर ध्यान दे रही हैं।

शीतल देवी को किस नाम से जाना जाता है?

उन्हें “भारत की चमत्कारी लड़की” (Miracle Girl of India) कहा जाता है।

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